नो-बॉल नियम: 3 बदलाव 2026 में
क्रिकेट में नो-बॉल गेंदबाज की ऐसी अवैध डिलीवरी है, जिस पर बल्लेबाजी टीम को कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर में नहीं गिनी जाती। भारत सहित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इसके नियम मेरिलबोन क्रिके...
नो-बॉल नियम: 3 बदलाव 2026 में
क्रिकेट में नो-बॉल गेंदबाज की ऐसी अवैध डिलीवरी है, जिस पर बल्लेबाजी टीम को कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर में नहीं गिनी जाती। भारत सहित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इसके नियम मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के क्रिकेट नियमों और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के खेलने की शर्तों से तय होते हैं। फ्रंट-फुट का क्रीज से आगे निकलना, कमर से ऊपर खतरनाक फुलटॉस और सीमित प्रारूपों में ऊंचाई सीमा से अधिक बाउंसर इसके प्रमुख कारण हैं। एक नो-बॉल पर बने बल्लेबाज के रन अलग जुड़ते हैं; उदाहरण के लिए चौका लगने पर कुल 5 रन हो सकते हैं। ट्वेंटी-20 और एकदिवसीय क्रिकेट में सामान्यतः अगली गेंद फ्री-हिट होती है, जबकि टेस्ट क्रिकेट में यह व्यवस्था लागू नहीं होती। सही निर्णय के लिए पहले अंपायर का संकेत देखें, फिर स्कोरबोर्ड में अतिरिक्त रन और गेंदों की गिनती जांचें।

क्रिकेट में नो-बॉल का निचोड़ क्या है?
नो-बॉल का सीधा अर्थ है कि गेंद नियमों के अनुसार वैध तरीके से नहीं फेंकी गई। बल्लेबाजी टीम को दंडस्वरूप 1 रन मिलता है, गेंद ओवर में शामिल नहीं होती और गेंद से बने अतिरिक्त रन भी स्कोर में जुड़ते हैं। यानी 1 रन की कीमत पर गेंदबाज ने केवल “एक छोटी गलती” नहीं की; कई बार पूरी पारी का गणित बिगड़ जाता है।
मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के नियम 21 में नो-बॉल से जुड़े प्रावधान दिए गए हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय मैचों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की प्रतियोगिता-विशिष्ट शर्तें भी लागू हो सकती हैं। नियम 21 का व्यावहारिक सार है: “अंपायर नो-बॉल का संकेत देगा और गेंद ओवर में नहीं गिनी जाएगी।” यही कारण है कि स्कोरर नो-बॉल को अतिरिक्त रन के रूप में दर्ज करता है और ओवर में गेंदों की संख्या नहीं बढ़ाता।
क्रिकेट गाइड पर इसे ऐसे समझिए: अगर गेंद पर बल्लेबाज ने 2 रन दौड़े, तो कुल स्कोर 3 रन होगा—1 नो-बॉल रन और 2 बल्लेबाजी रन। अगर गेंद सीमा रेखा पार करके चौका बनती है, तो कुल 5 रन दर्ज हो सकते हैं। हालांकि बल्ले से लगा चौका, बाई, लेग-बाई और गेंद के मैदान से बाहर जाने की स्थिति में स्कोरिंग का वर्गीकरण अलग हो सकता है। क्रिकेट स्कोरिंग की शुरुआती मार्गदर्शिका
नियम पढ़ने का सबसे लाभकारी तरीका “कितने रन मिले” से पहले “गेंद वैध थी या नहीं” पूछना है। इसी क्रम से फ्रंट-फुट, बैक-फुट, फुलटॉस, बाउंसर और फील्डिंग प्रतिबंधों को समझना आसान होता है।
आगे के नियमों को उदाहरणों के साथ समझने के लिए यह उपयोगी संदर्भ देखें।
खिलाड़ी असल में क्या देखते हैं?
मैदान पर खिलाड़ी सबसे पहले अंपायर की फैली हुई बांह देखते हैं। यह नो-बॉल का आधिकारिक संकेत है। बल्लेबाज के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि गेंद पर शॉट खेलने के बाद रन पूरा करने का अवसर बना रहता है, जबकि गेंदबाज और क्षेत्ररक्षण टीम को अगली डिलीवरी के लिए तुरंत योजना बदलनी पड़ती है। आधुनिक स्कोरबोर्ड में “अतिरिक्त” या “नो-बॉल” कॉलम इस दंड को अलग दिखाता है।
फ्रंट-फुट नो-बॉल सबसे आम प्रकार है। गेंद छोड़ते समय गेंदबाज का अगला पैर पॉपिंग क्रीज के पीछे जमीन पर होना चाहिए; रेखा को छूना भी सुरक्षित स्थिति नहीं माना जाता। पीछे वाला पैर रिटर्न क्रीज के भीतर रहना चाहिए, ताकि गेंदबाज कोण बनाकर क्रीज से बाहर न निकल जाए। तेज गेंदबाजों के लंबे रन-अप में यही गलती महंगी पड़ती है—एक रन, अतिरिक्त गेंद और सीमित ओवर में फ्री-हिट का जोखिम।
नो-बॉल केवल पैर की गलती नहीं है। गेंदबाज का हाथ असामान्य तरीके से गेंद फेंके, गेंद बल्लेबाज तक पहुंचने से पहले दो बार से अधिक जमीन पर टप्पा खाए, या गेंद पिच के बाहर से डाली जाए, तो भी अंपायर कार्रवाई कर सकता है। गेंदबाज को विकेट के पीछे से या गलत दिशा में गेंद डालने पर भी नियमों का सामना करना पड़ सकता है।
बल्लेबाज के लिए एक कम चर्चित लाभ यह है कि नो-बॉल पर सामान्य कैच, बोल्ड, एलबीडब्ल्यू और स्टंपिंग से आउट नहीं दिया जा सकता। रन-आउट, हिट-विकेट और कुछ विशेष परिस्थितियों में क्षेत्ररक्षण से जुड़े आउट अब भी संभव रहते हैं। इसलिए “नो-बॉल पर बल्लेबाज आउट नहीं हो सकता” कहना आधा-सच है—इसे बिना शर्त नियम मानना स्कोरकार्ड पढ़ते समय गलती करवा सकता है।

सबसे ज्यादा असर डालने वाली 3 बातें कौन-सी हैं?
नो-बॉल का वास्तविक असर तीन चीजों से तय होता है: दंड का रन, ओवर में अतिरिक्त गेंद और अगली गेंद की स्थिति। इन तीनों को अलग-अलग नहीं, एक साथ देखना चाहिए। एक रक्षात्मक ओवर में भी नो-बॉल बल्लेबाजी टीम को मुफ्त अवसर दे सकती है; वहीं अंतिम ओवर में यह मैच का पलड़ा सीधा बदल देती है।
1. फ्रंट-फुट और क्रीज की स्थिति
गेंद छोड़ते समय अगला पैर पॉपिंग क्रीज के पीछे रहना चाहिए। पैर का कुछ हिस्सा रेखा के पीछे हो, तभी स्थिति सुरक्षित है; क्रीज पर पैर रखना या रेखा पार करना नो-बॉल बन सकता है। तीसरे अंपायर की सहायता से पैरों की जांच की जाती है, खासकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और बड़े ट्वेंटी-20 मुकाबलों में।
यहां एक व्यावहारिक बारीकी है: गेंदबाज का पैर पीछे हो सकता है, लेकिन गेंद छोड़ने का क्षण निर्णायक होता है। रन-अप के अंत में संतुलन बिगड़ने पर पैर आगे खिसकता है और गेंद सही दिखने के बावजूद नो-बॉल घोषित हो सकती है। गेंदबाजी प्रशिक्षक अक्सर लैंडिंग मार्क को पॉपिंग क्रीज से पर्याप्त दूरी पर रखते हैं, क्योंकि केवल आधा जूता बचाना भरोसेमंद रणनीति नहीं है।
2. कमर से ऊपर फुलटॉस और बाउंसर
बिना टप्पे की गेंद यदि बल्लेबाज की कमर से ऊपर पहुंचती है और अंपायर उसे खतरनाक मानता है, तो वह नो-बॉल हो सकती है। निर्णय गेंद की ऊंचाई, बल्लेबाज के खड़े होने और गेंद की गति पर निर्भर करता है। तेज गेंदबाज की कमर-ऊंचाई वाली फुलटॉस और धीमी गेंदबाज की ऊंची फुलटॉस को हमेशा एक ही नजर से नहीं देखा जाता।
बाउंसर के लिए ट्वेंटी-20, एकदिवसीय और टेस्ट क्रिकेट में अलग प्रतियोगिता शर्तें हो सकती हैं। आम तौर पर बल्लेबाज के सिर या कंधे से ऊपर जाने वाली गेंद को सीमित संख्या में ही वैध माना जाता है; सीमा पार होने पर नो-बॉल लगती है। सटीक संख्या प्रतियोगिता के नियम-पत्र में देखनी चाहिए, क्योंकि घरेलू क्रिकेट, युवा क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों में प्रावधान बदल सकते हैं।
3. फ्री-हिट और गेंद की गिनती
ट्वेंटी-20 तथा एकदिवसीय मैचों में नो-बॉल के बाद आने वाली गेंद सामान्यतः फ्री-हिट होती है। फ्री-हिट पर बल्लेबाज बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू या स्टंपिंग से आउट नहीं हो सकता, लेकिन रन-आउट, हिट-विकेट और क्षेत्ररक्षण के कुछ मामलों में विकेट संभव है। टेस्ट क्रिकेट में नो-बॉल के बाद फ्री-हिट नहीं दी जाती—यही प्रारूपों के बीच सबसे महत्वपूर्ण अंतर है।
गेंद की गिनती वाला भाग स्कोरकार्ड में अक्सर भ्रम पैदा करता है। यदि ओवर की छठी गेंद नो-बॉल थी, तो ओवर समाप्त नहीं होता; अगली वैध गेंद फिर उसी ओवर की गेंद मानी जाएगी। वाइड और नो-बॉल दोनों अतिरिक्त गेंद कराते हैं, पर फ्री-हिट का संबंध सामान्यतः नो-बॉल से जुड़ा है, वाइड से नहीं।
इन तीन बिंदुओं को एक छोटे हिसाब में देखिए:
- नो-बॉल: 1 अतिरिक्त रन और गेंद दोबारा।
- नो-बॉल पर 2 रन: कुल 3 रन, जिसमें 1 अतिरिक्त शामिल।
- नो-बॉल के बाद सीमित प्रारूप में वैध अगली गेंद: फ्री-हिट।
- नो-बॉल पर कैच: सामान्य कैच से आउट नहीं, मगर अन्य वैध आउट संभव।
इस हिस्से के बाद स्कोर पढ़ने की एक गलती पकड़ना आसान है: बल्लेबाज के खाते में गया रन और टीम के अतिरिक्त रन एक ही चीज नहीं होते।
किन अपवादों और छिपे जोखिमों पर ध्यान दें?
नो-बॉल के नियम सरल दिखते हैं, लेकिन कुछ स्थितियां “आम नियम” को अधूरा बना देती हैं। पहला अपवाद स्कोरिंग का है: नो-बॉल पर दौड़े गए रन बल्लेबाज के खाते में जा सकते हैं, मगर नो-बॉल का 1 रन अतिरिक्त में ही रहता है। गेंद बल्ले से नहीं लगी और रन दौड़े गए, तो वे आम तौर पर नो-बॉल अतिरिक्त के साथ बाई या लेग-बाई के रूप में दर्ज हो सकते हैं।
दूसरा जोखिम खतरनाक गेंदों का है। कमर से ऊपर फुलटॉस या अत्यधिक ऊंची बाउंसर केवल रन देने वाला अपराध नहीं मानी जाती; अंपायर गेंदबाज को चेतावनी दे सकता है और दोहराव पर कार्रवाई बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की आचार और खेलने की शर्तों में सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। नियमों का मूल सिद्धांत है: “खतरनाक और अनुचित गेंदबाजी को नियंत्रित किया जाना चाहिए।” इसलिए हर नो-बॉल का परिणाम केवल स्कोरबोर्ड पर 1 रन नहीं होता।
तीसरा मामला विकेटकीपर और फील्डिंग प्रतिबंधों का है। विकेटकीपर गेंद पड़ने से पहले विकेट के बहुत आगे आ जाए, या क्षेत्ररक्षण टीम निर्धारित घेरा नियम तोड़े, तो अंपायर नो-बॉल या अन्य दंड दे सकता है। सीमित ओवरों में पावरप्ले के दौरान 30-यार्ड घेरे के भीतर और बाहर खिलाड़ियों की संख्या प्रतियोगिता नियमों से नियंत्रित होती है।
चौथा मामला गेंदबाज के छोर और डिलीवरी की दिशा से संबंधित है। गेंदबाज यदि विकेट के गलत हिस्से से गेंद डालता है या अंपायर को भ्रमित करने वाली स्थिति बनती है, तो नो-बॉल का निर्णय हो सकता है। यह टीवी दर्शक को तुरंत दिखाई नहीं देता, क्योंकि कैमरा अक्सर गेंद और बल्लेबाज पर केंद्रित रहता है, पैरों और क्रीज के कोण पर नहीं।

अंपायर संकेत और तकनीकी समीक्षा के बीच अंतर भी समझना जरूरी है। मैदानी अंपायर नो-बॉल घोषित कर सकता है, लेकिन फ्रंट-फुट के मामलों में तीसरा अंपायर पुष्टि कर सकता है। तकनीक उपलब्ध न हो तो मैदानी निर्णय प्रभावी रहता है, और घरेलू प्रतियोगिताओं में स्थानीय नियम लागू हो सकते हैं। अंपायर संकेतों और डीआरएस की पूरी जानकारी
एक और कम चर्चित बात: फ्री-हिट की अगली गेंद यदि वाइड या फिर नो-बॉल हो जाए, तो फ्री-हिट का लाभ अगली वैध गेंद तक जारी रहता है। यानी बल्लेबाज को एक ही अवसर पर “फ्री-हिट खत्म” मान लेना जल्दबाजी है। यही वह छोटा नियम है जो अंतिम ओवर में गेंदों की रणनीति और संभावित रन दोनों बदल देता है।
आधिकारिक नियमों की तुलना के लिए मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के क्रिकेट नियम और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की प्रतियोगिता शर्तें देखना सबसे सुरक्षित तरीका है। ट्वेंटी-20 और एकदिवसीय नियमों की तुलना
अंतिम फैसला: नो-बॉल को कैसे पढ़ें?
नो-बॉल को केवल गेंदबाज की गलती समझना कमतर विश्लेषण है। यह एक साथ रन, अतिरिक्त डिलीवरी, फ्री-हिट, संभावित चेतावनी और बल्लेबाजी की आक्रामक रणनीति को प्रभावित करती है। फ्रंट-फुट की स्थिति, कमर से ऊपर फुलटॉस, बाउंसर सीमा और फील्डिंग प्रतिबंध इसके चार प्रमुख जांच-बिंदु हैं।
लाभ-हानि का हिसाब साफ है: 1 रन निश्चित रूप से चला गया, ओवर में एक गेंद बढ़ गई और ट्वेंटी-20 या एकदिवसीय क्रिकेट में बल्लेबाज को फ्री-हिट मिल सकती है। इसलिए गेंदबाज के लिए रन-अप नियंत्रण और रिलीज-पॉइंट, जबकि बल्लेबाज के लिए अंपायर संकेत और फ्री-हिट की समझ सबसे ज्यादा मूल्यवान है। क्रिकेट गाइड की सलाह सीधी है—स्कोरकार्ड में “नो-बॉल” दिखे तो पहले अतिरिक्त रन, फिर गेंदों की संख्या और उसके बाद आउट होने की स्थिति जांचें।
नियमों की ताजा व्याख्या और मैच रणनीति पढ़ने के लिए क्रिकेट गाइड के दैनिक विश्लेषण से जुड़े रहना उपयोगी रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्रिकेट में नो-बॉल क्या होती है?
उत्तर: नो-बॉल वह अवैध गेंद है, जो गेंदबाज द्वारा क्रिकेट के निर्धारित नियमों के विरुद्ध फेंकी जाती है। बल्लेबाजी टीम को कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर में नहीं गिनी जाती। फ्रंट-फुट का क्रीज पार करना, कमर से ऊपर खतरनाक फुलटॉस और निर्धारित सीमा से अधिक बाउंसर इसके सामान्य कारण हैं। गेंद पर बने अतिरिक्त रन भी टीम के कुल स्कोर में जुड़ते हैं।
प्रश्न: नो-बॉल पर कितने रन मिलते हैं?
उत्तर: नो-बॉल पर कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है, लेकिन कुल रन गेंद के परिणाम पर निर्भर करते हैं। बल्लेबाज ने 2 रन दौड़े तो कुल 3 रन दर्ज होंगे; चौका लगने पर सामान्यतः कुल 5 रन बन सकते हैं। नो-बॉल का 1 रन अतिरिक्त में रहता है, जबकि बल्ले से बने रन बल्लेबाज के खाते में दर्ज हो सकते हैं।
प्रश्न: नो-बॉल और वाइड में क्या अंतर है?
उत्तर: दोनों पर 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर में नहीं गिनी जाती, लेकिन कारण और फ्री-हिट का नियम अलग है। वाइड गेंद बल्लेबाज की पहुंच से बाहर जाने के कारण दी जाती है, जबकि नो-बॉल गेंदबाज की डिलीवरी या फील्डिंग संबंधी उल्लंघन से जुड़ी होती है। सीमित प्रारूपों में नो-बॉल के बाद फ्री-हिट मिलती है, सामान्य वाइड के बाद नहीं।
प्रश्न: नो-बॉल के बाद फ्री-हिट कब मिलती है?
उत्तर: ट्वेंटी-20 और एकदिवसीय क्रिकेट में सामान्यतः नो-बॉल के बाद आने वाली गेंद फ्री-हिट होती है। टेस्ट क्रिकेट में आम तौर पर यह सुविधा नहीं दी जाती। यदि फ्री-हिट गेंद फिर वाइड या नो-बॉल हो जाए, तो अगली वैध गेंद तक फ्री-हिट जारी रहती है; इसलिए बल्लेबाज और स्कोरर को गेंद की वैधता क्रम से देखनी चाहिए।
प्रश्न: नो-बॉल पर बल्लेबाज आउट हो सकता है?
उत्तर: नो-बॉल पर बल्लेबाज सामान्य कैच, बोल्ड, एलबीडब्ल्यू या स्टंपिंग से आउट नहीं होता, लेकिन रन-आउट और हिट-विकेट जैसे तरीके संभव रहते हैं। यदि बल्लेबाज गेंद खेलने के बाद रन के लिए भागता है और क्रीज से बाहर है, तो रन-आउट दिया जा सकता है। इसलिए “नो-बॉल पर आउट नहीं” पूर्ण नियम नहीं, बल्कि सीमित परिस्थितियों वाला कथन है।
प्रश्न: फ्रंट-फुट नो-बॉल कैसे पहचानी जाती है?
उत्तर: फ्रंट-फुट नो-बॉल तब होती है जब गेंद छोड़ते समय गेंदबाज का अगला पैर पॉपिंग क्रीज को छूता या पार करता है। तीसरा अंपायर अक्सर कैमरा-रीप्ले से पैर और क्रीज की स्थिति जांचता है, खासकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में। गेंदबाजों को लैंडिंग मार्क क्रीज से पीछे रखना चाहिए, क्योंकि रिलीज के क्षण का छोटा-सा संतुलन बदलाव भी दंड दे सकता है।
प्रश्न: नो-बॉल पर कुल स्कोर कैसे गिनें?
उत्तर: कुल स्कोर निकालने के लिए नो-बॉल का 1 अतिरिक्त रन, दौड़े गए रन और बल्ले से बने रन अलग-अलग जोड़ें। उदाहरण के लिए, बल्लेबाज ने नो-बॉल पर 2 रन दौड़े तो टीम को 3 रन मिलेंगे, जबकि नो-बॉल पर चौका लगने पर कुल 5 रन हो सकते हैं। स्कोरकार्ड में अतिरिक्त रन अलग दिख सकते हैं, इसलिए बल्लेबाज के निजी स्कोर और टीम स्कोर को मिलाना नहीं चाहिए।
नियमों को मैच की स्थिति, प्रारूप और प्रतियोगिता की आधिकारिक शर्तों के साथ पढ़ें—यही सबसे भरोसेमंद तरीका है। विस्तृत क्रिकेट कवरेज के लिए क्रिकेट गाइड देखें।
पढ़ने के लिए धन्यवाद।
क्रिकेट गाइड · Editorial Archive · 2026